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Today, Mata Brahmacharinid - माता ब्रह्मचारिणी worshiped during Shardiya Navratri 2017.

चालीसा: श्री हनुमान जी

चालीसा: श्री हनुमान जी
॥ दोहा॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

॥ चौपाई ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥
कञ्चन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥
सङ्कर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥
लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥
रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना । लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥
सब सुख लहै तुह्मारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥
आपन तेज सह्मारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥
सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

चारों जुग परताप तुह्मारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥
साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥
राम रसायन तुह्मरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

तुह्मरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

॥ दोहा ॥
पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

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Hindi Version in English

॥ Doha ॥
Shri Guru Charan Saroj raj Nija manu Mukura sudhari ।
Baranau Raghuvar Bimal Jasu Jo Dayaku Phala Chari ॥
Budheeheen Tanu Jannike Sumiro Pavan Kumara ।
Bal Buddhi Vidya Dehoo Mohee Harahu Kalesh Vikaar ॥

॥ Chaupai ॥
Jai Hanuman gyan gun sagar । Jai Kapis tihun lok ujagar ॥
Ram doot atulit bal dhama । Anjani putra Pavan sut nama ॥
Mahabir vikram Bajrangi । Kumati nivar sumati Ke sangi ॥
Kanchan varan viraj subesa । Kanan Kundal Kunchit Kesha ॥

Hath Vajra Aur Dhwaja Viraje । Kaandhe moonj janeu saaje ॥
Sankar suvan kesri Nandan । Tej prataap maha jag vandan ॥
Vidyavaan guni ati chatur । Ram kaj karibe ko aatur ॥
Prabhu charitra sunibe ko rasiya । Ram Lakhan Sita man Basiya ॥

Sukshma roop dhari Siyahi dikhava । Vikat roop dhari lank jalava ॥
Bhim roop dhari asur sanhare । Ramachandra ke kaj sanvare ॥
Laye Sanjivan Lakhan Jiyaye । Shri Raghuvir Harashi ur laye ॥
Raghupati Kinhi bahut badai । Tum mama priya Bharat-hi-sam bhai ॥

Sahas badan tumharo yash gaave । As kahi Shripati kanth lagaave ॥
Sankadhik Brahmaadi Muneesa । Narad Sarad sahit Aheesa ॥
Yam Kuber Dikpaal Jahan te । Kavi kovid kahi sake kahan te ॥
Tum upkar Sugreevahin keenha । Ram milaye rajpad deenha ॥

Tumhro mantra Vibheeshan maana । Lankeshwar Bhaye Sab jag jana ॥
Yug sahasra yojan par Bhanu । Leelyo tahi madhur phal janu ॥
Prabhu mudrika meli mukh mahee । Jaladhi langhi gaye achraj nahee ॥
Durgam kaj jagat ke jete । Sugam anugraha tumhre tete ॥

Ram duwaare tum rakhvare । Hot na agya binu paisare ॥
Sab sukh lahai tumhari sarna । Tum rakshak kahu ko darna ॥
Aapan tej samharo aapai । Teenon lok hank te kanpai ॥
Bhoot pisaach Nikat nahin aavai । Mahavir jab naam sunavai ॥

Nase rog harae sab peera । Japat nirantar Hanumat beera ॥
Sankat se Hanuman chhudavai । Man Kram Vachan dhyan jo lavai ॥
Sab par Ram tapasvee raja । Tin ke kaj sakal Tum saja ॥
Aur manorath jo koi lavai । Soi amit jeevan phal pavai ॥

Charon jug partap tumhara । Hai parsiddh jagat ujiyara ॥
Sadhu Sant ke tum Rakhware । Asur nikandan Ram dulare ॥
Ashta siddhi nav nidhi ke data । As var deen Janki mata ॥
Ram rasayan tumhare pasa । Sada raho Raghupati ke dasa ॥

Tumhare bhajan Ram ko pavai । Janam janam ke dukh bisraavai ॥
Antkaal Raghuvar pur jayee । Jahan janam Hari Bhakt Kahayee ॥
Aur Devta Chitt na dharahin । Hanumat sei sarv sukh karahin ॥
Sankat kate mite sab peera । Jo sumirai Hanumat Balbeera ॥

Jai Jai Jai Hanuman Gosain । Kripa Karahun Gurudev ki nayin ॥
Jo shat bar path kare koi । Chhutahin bandi maha sukh hoi ॥
Jo yeh padhe Hanuman Chalisa । Hoye siddhi saakhi Gaureesa ॥
Tulsidas sada hari chera । Keejai Nath Hriday mahn dera ॥

॥ Doha ॥
Pavan Tanay Sankat Harana Mangala Murati Roop ।
Ram Lakhan Sita Sahita Hriday Basahu Soor Bhoop ॥
- Nitin Pratap Singh
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