close this ads
Next: Ganga Dussehra [4 June] | Gayatri Jayanti [5 June]

चालीसा: श्री हनुमान जी

चालीसा: श्री हनुमान जी
॥ श्री हनुमान चालीसा ॥

॥दोहा॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

॥चौपाई॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥
कञ्चन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥
सङ्कर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥
लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥
रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना । लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥
सब सुख लहै तुह्मारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥
आपन तेज सह्मारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥
सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

चारों जुग परताप तुह्मारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥
साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥
राम रसायन तुह्मरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

तुह्मरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

॥दोहा॥
पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

Hindi Version in English

॥ Doha ॥
Shri Guru Charan Saroj raj Nija manu Mukura sudhari ।
Baranau Raghuvar Bimal Jasu Jo Dayaku Phala Chari ॥
Budheeheen Tanu Jannike Sumiro Pavan Kumara ।
Bal Buddhi Vidya Dehoo Mohee Harahu Kalesh Vikaar ॥

॥ Chaupaii ॥
Jai Hanuman gyan gun sagar । Jai Kapis tihun lok ujagar ॥
Ram doot atulit bal dhama । Anjani putra Pavan sut nama ॥
Mahabir vikram Bajrangi । Kumati nivar sumati Ke sangi ॥
Kanchan varan viraj subesa । Kanan Kundal Kunchit Kesha ॥

Hath Vajra Aur Dhwaja Viraje । Kaandhe moonj janeu saaje ॥
Sankar suvan kesri Nandan । Tej prataap maha jag vandan ॥
Vidyavaan guni ati chatur । Ram kaj karibe ko aatur ॥
Prabhu charitra sunibe ko rasiya । Ram Lakhan Sita man Basiya ॥

Sukshma roop dhari Siyahi dikhava । Vikat roop dhari lank jalava ॥
Bhim roop dhari asur sanhare । Ramachandra ke kaj sanvare ॥
Laye Sanjivan Lakhan Jiyaye । Shri Raghuvir Harashi ur laye ॥
Raghupati Kinhi bahut badai । Tum mama priya Bharat-hi-sam bhai ॥

Sahas badan tumharo yash gaave । As kahi Shripati kanth lagaave ॥
Sankadhik Brahmaadi Muneesa । Narad Sarad sahit Aheesa ॥
Yam Kuber Dikpaal Jahan te । Kavi kovid kahi sake kahan te ॥
Tum upkar Sugreevahin keenha । Ram milaye rajpad deenha ॥

Tumhro mantra Vibheeshan maana । Lankeshwar Bhaye Sab jag jana ॥
Yug sahasra yojan par Bhanu । Leelyo tahi madhur phal janu ॥
Prabhu mudrika meli mukh mahee । Jaladhi langhi gaye achraj nahee ॥
Durgam kaj jagat ke jete । Sugam anugraha tumhre tete ॥

Ram duwaare tum rakhvare । Hot na agya binu paisare ॥
Sab sukh lahai tumhari sarna । Tum rakshak kahu ko darna ॥
Aapan tej samharo aapai । Teenon lok hank te kanpai ॥
Bhoot pisaach Nikat nahin aavai । Mahavir jab naam sunavai ॥

Nase rog harae sab peera । Japat nirantar Hanumat beera ॥
Sankat se Hanuman chhudavai । Man Kram Vachan dhyan jo lavai ॥
Sab par Ram tapasvee raja । Tin ke kaj sakal Tum saja ॥
Aur manorath jo koi lavai । Soi amit jeevan phal pavai ॥

Charon jug partap tumhara । Hai parsiddh jagat ujiyara ॥
Sadhu Sant ke tum Rakhware । Asur nikandan Ram dulare ॥
Ashta siddhi nav nidhi ke data । As var deen Janki mata ॥
Ram rasayan tumhare pasa । Sada raho Raghupati ke dasa ॥

Tumhare bhajan Ram ko pavai । Janam janam ke dukh bisraavai ॥
Antkaal Raghuvar pur jayee । Jahan janam Hari Bhakt Kahayee ॥
Aur Devta Chitt na dharahin । Hanumat sei sarv sukh karahin ॥
Sankat kate mite sab peera । Jo sumirai Hanumat Balbeera ॥

Jai Jai Jai Hanuman Gosain । Kripa Karahun Gurudev ki nayin ॥
Jo shat bar path kare koi । Chhutahin bandi maha sukh hoi ॥
Jo yeh padhe Hanuman Chalisa । Hoye siddhi saakhi Gaureesa ॥
Tulsidas sada hari chera । Keejai Nath Hriday mahn dera ॥

॥ Doha ॥
Pavan Tanay Sankat Harana Mangala Murati Roop ।
Ram Lakhan Sita Sahita Hriday Basahu Soor Bhoop ॥


Read Also:
» हनुमान जयंती - Hanuman Jayanti
» दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान बालाजी मंदिर!
» श्री हनुमान जी की आरती
» संकट मोचन हनुमानाष्टक
» श्री बजरंग बाण पाठ
» श्री बालाजी की आरती
- Nitin Pratap Singh
प्रेरक कहानी: बाँके बिहारी जी का प्रेम
एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी...
मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ?
प्रेरक कथा: मैं ना होता तो क्या होता ?
पर हनुमान जी, प्रभु श्रीराम से कहते है...
प्रभु, यदि मैं लंका न जाता, तो मेरे जीवन में बड़ी कमी रह जाती। विभीषण का घर जब तक मैंने नही देखा था, तब तक मुझे लगता था, कि लंका में भला सन्त कहाँ मिलेंगे...
दिल्ली के प्रमुख श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर
List of top Shri Krishna Pranami Dharm Temples in New Delhi, Noida, Ghaziabad...
दिल्ली के प्रसिद्ध वाल्मीकि मंदिर!
Maharishi Valmiki is considered as the first poet of Sanskrit language. Indian valmiki samaj worship him as a God. List of Bhagwan Valmiki temples of New Delhi, Noida, Ghaziabad, and Gurugram.
दिल्ली के प्रसिद्ध श्री शनिदेव मंदिर - 25 May 2017
Surydev's son Shri Shanidev governs planet Saturn, one of the member in Navgrah. Devotees pray Him on weekday Saturday.
List of top famous Shri Shanidev temples in New Delhi, Noida, Gurugram and Ghaziabad...
श्री शनि जयंती के लिए दिल्ली के प्रसिद्ध मंदिर - 25 May 2017
श्री शनि जयंती! सूर्य देव एवं देवी छाया के पुत्र श्री शनिदेव के अवतरण दिवस के रूप मे मनाई जाती है।
आगे देखिए दिल्ली, गाज़ियाबाद के कुछ प्रसिद्ध मंदिर जहाँ मनाई जाती है, श्री शनि जयंती!
चालीसा: श्री शनिदेव जी
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
आरती: श्री शनिदेव जी
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥जय जय..॥
मंत्र: महामृत्युंजय मंत्र, संजीवनी मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
आरती: श्री पार्वती माँ
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता, ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता।
अरिकुल कंटक नासनि, निज सेवक त्राता, जगजननी जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
Bhagwan Valmiki MandirBhagwan Valmiki Mandir
Swami Raghawanand Ji Maharaj from Delhi Udasin Ashram inaugurated भगवान वाल्मीकि मंदिर (Bhagwan Valmiki Mandir) on the occasion of Valmiki Jayanti in 2015. Valmiki temple is easily accessible from Rohini East metro station.
सहारनपुर और कश्मीर की हालत
कत्ल-ओ-गारत के इस खेल को ,क्यो बढा रहे हो तुम..

दुशमन हर तरफ बैठा है ,पर खुद पर पत्थर चला रहे हो तुम...
मसखरी - Maskhari
ऐसा लग रहा है कि विजय माल्या रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर टीम के खिलाडियों का पैसा भी दबा कर भगे हैं , आईपीएल में उन बेचारों का मारे अफ़सोस के परफॉरमेंस ही बिगड़ गया 🙂
घुरपेँच - Ghurpainch
आज लोगों को कब Sorry, Excuse Me, Thank You बोलना है, पता है।
पर सामने-वाले को हिन्दी मे आप (तू नहीं) बोलना होता है, बस ये नहीं पता।
मेरा नमस्ते कहना...
X ने Y को कहा, कि मेरा प्रणाम Z को बोलना...
अतः X चाहते हैं कि Y, Z को आज एक बार और प्रणाम करें।
अर्थात Y, Z से आज, एक बार और विनम्रता पूर्वक संवाद स्थापित करें।
कटप्पा ने बाहुबली क्यों मारा?
कटप्पा ने बाहुबली क्यों मारा?
...भारत को! ये जानना ज़्यादा इम्पोर्टेंट है क्या...?
पत्तल में खाने के महत्व
» पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है।
» केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है।
मटके के पानी के फायदे!
» इस पानी को पीने से थकान दूर होती है।
» इसे पीने से पेट में भारीपन की समस्या भी नहीं होती।
» मटके की मिट्टी कीटाणुनाशक होती है जो पानी में से दूषित पदार्थो को साफ करने का काम करती है।
हाथ-पैरों में आने वाले ‪पसीने‬ का उपचार
आँवला चूर्ण एवं पिसी हुई मिश्री बराबर मात्रा मे मिलाकर प्रतिदिन सुवह - शाम 1-1 चम्मच सेवन करने से कुछ समय मे ही, हाथ की हथेली और पैरों के तलवों से आने वाले पसीने की समस्या मे लाभ मिलता है...
गर्मियों में हाथ पैरों में अकड़ाहट
इसलिए प्याज के रस को गुनगुना करके हथेलियों और पैर के तलवों की मालिश करने से अकड़ाहट मे लाभ मिलता है...
तलवों मे जलन को दूर करें
गुनगुने पानी मे एक चम्मच सरसों का तेल डालकर दोनो पैर दस मिनट के लिए इसमें डुबाकर रखें...
स्वच्छ भारत अभियान - Swachh Bharat Abhiyan
^
top