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लव का महीना

लव का महीना
जो लोग कहते हैं कि प्यार का कोई समय, दिन, महीना नही होता है, वही लोग फ़रवरी में कुछ अधिक फुदकते हैं। लाजमी है फ़रवरी के चौदह तारीख का महत्त्व उनके लिए ठीक वैसा ही होता है जैसे जुआरियों के लिए दिवाली, क्योंकि सब फ़िराक का मामला है। जैसे जुआरी फ़िराक में चैबीस घंटे रहते हैं, मौका मिलते ही खेल लेते है, हार जाते हैं, जीत जाते हैं, पकड़े जाते हैं, कूटे जाते हैं, छूट जाते हैं पर दीवाली पर जुआ खेलने की अधिकारिक मान्यता होने की की दलील देते हैं। कुछ कुछ वैसी ही प्रेम की कहानी है। ख़ुशी और गम दोनों जगह है। संतोष दोनों जगह नही है। हाँ प्रेम दिवस वेलेंटाइन जी के याद में मनाते है पर अगर वो जिन्दा होते तो धन्य हो जाते कि उनको याद करने वाले कितने और कैसे-कैसे लोग हैं।जिस धरती पर सिर्फ बात कर लेने भर से गोली चल जाती है उस धरती पर बेचारे प्रेमी कैसी-कैसी यातनाएँ झेल कर भी उनको याद करते हैं और इस दिन को महोत्सव में बदल देते हैं।

इस लव के महीने में बहुत कुछ बदलता है। पहले कम था अब ज्यादा बदलने लगा है। प्यार में स्थायित्वता प्राप्त कर चुके लोग अपने सच्चे प्यार का सबूत देते हैं और कुछ नवोदित अपना भाग्य आजमाते हैं। कुछ सफल होते हैं, कुछ की कुटाई होती है। कुछ मुस्कुराते हैं, कुछ रोते हैं। कुछ की बांछे खिल जाती है, कुछ मुँह छिपाते फिरते है। सब लव के महीने में होता है। हाँ एक बात जो निकल के आती है वो यह कि प्रेमी बड़े हिम्मती होते हैं। धैर्यवान होते हैं। कभी-कभी उन्हें देश की संस्कृति के विपरीत कार्य करने का विरोध भी झेलना पड़ता है, पर हँस कर झेल लेते हैं। कभी-कभी प्रेम दिवस मनाने के चक्कर में संस्कृति के कुछ ठेकेदारों द्वारा धरे भी जाते है, पर बहादुरी से सामना करते हैं। कभी-कभी परिवार वालों के सामने कान पकड़ कर उठक-बैठक भी करना पड़ता है, पर हँसते हँसते सब सह जाते हैं। इससे उनकी बहादुरी एवं प्रेम के प्रति समर्पण व्यक्त होता है। यह सब लव के महीने में अधिक होता है। जैसे ही फ़रवरी का महीना शुरू होता है, प्यार करने वाले लोग और प्यार की शुरुआत करने वाले लोग योजना में लग जाते हैं। प्रेम करने वाला कंजूस हो या खर्च करने वाला, इस माह में सभी के दिल खुल जाते है, जेब खाली हो जाता है, खाली नही होता है तो खाली करवा लिया जाता है। क्योंकि प्रेम ही सब कुछ है। प्रेम शाश्वत है। प्रेम के बिना जीवन सूना है।

हमारे एक मित्र हैं शर्मा जी। हैं तो कंजूस टाइप के पर बड़ी धूमधाम से इस उत्सव की तैयारी करते हैं। उनका अपना तरीका है क्योंकि वो बड़े दिलवाले हैं। इस महोत्सव में वो तीन-चार लोगों को उपहार देते हैं। अभी जनवरी से ही वो गिफ्ट खरीदने में लग गए मैंने पूछा कि भाईसाहब इतनी जल्दी क्या है तो उन्होंने बताया कि अभी ऑफ़ सीजन चल रहा है, गिफ्ट थोड़ा सस्ते में आ जायेगा। मुझे भी उनकी बात ठीक लगी और सोचा यदि इनके पास बाग़ होता तो शायद दिसंबर से ही फूलों की खेती शुरू कर देते ताकि गुलदस्ते भी सस्ते में निपट जाये। यह तो मज़बूरी है कि गुलदस्ते उसी दिन लेना पड़ेगा। कम्बक्ख्त ये फूल भी बड़े जल्दी मुरझा जाते हैं।

हमारे एक और मित्र है यादव जी, वो भी बड़े दिलवाले हैं साथ ही साथ बड़े भोले भी हैं। कई साल से एक ही प्रेमिका है, लव के महीने में खूब खर्च करते हैं अतः प्रेमिका ने उन्हें बदलना उचित नही समझा। मैंने उनसे भी पूछा आप कि आप इतना क्यों लुटाते हैं तो वो तो भड़क ही गए क्योंकि वो बड़े भोले हैं। मेरे प्रश्न से उनके भावुक दिल को कहीं चोट सी लगी। फिर एक बढ़िया वाला लेक्चर दिए, जो लगभग लगभग हर आध्यात्मिक आशिकों की जुबाँ पर होता है। कहने लगे भाई दुनिया में प्रेम ही तो है, हम प्रेम करते हैं तो इसे सार्वजानिक स्वीकार करने में, मनाने में, यादगार बनाने में, उपहार देने में क्या हर्ज़ है। इस संसार में प्रेम से बढ़कर कुछ नही है। पैसा हम खर्च करने के लिए ही कमाते है, पैसा आता है चला जाता है, इसलिए प्रेम के नाम पर थोड़ा बहुत खर्च करने में कोई बुराई नही है। उनकी बातों से मुझे भी एह्साह हुआ कि वो ठीक ही कह रहें है। केवल खर्च करना ही क्या है, जब प्रेम इतना महान है तो उसमे बर्बाद होने में भी कोई बुराई नही है। प्रेम का ही इतिहास रहा है। जयसिंह से लेकर मंजनू तक, चाँद मोहम्मद से लेकर मटुकनाथ तक। प्रेम का इतिहास रहा है।

सब की बात सुन-सुना कर मुझे लगने लगा कि इस लव के महीने में भी मेरा ह्रदय इतना शुष्क क्यों है। फिर अपने अतीत पर नजर डाला तो भी कुछ नही मिला। हाँ कॉलेज में एक लड़का था सुरेश, उसने इस पर्व को मनाने की असफल कोशिश की थी। असफल इसलिए कि चौदह फ़रवरी से लेकर चौदह मार्च तक अस्पताल में रहा। दरअसल जिसे उसने फूल दिया उसके फूल जैसे भाइयों की नजर सुरेश पर पड़ गयी। बाकी का क्या हुआ आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। हाँ पर इंसानियत बची है इस बात का उदहारण रहा कि लड़की के भाइयों से पीटने के बाद सुरेश के लिए तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था करा दी गयी थी वर्ना हादसा और बड़ा भी हो सकता था। इस घटना से हमको लगा कि प्यार-वार रिस्की लोगों के लिए है। तभी से लव का महीना शुष्क ही अच्छा लगता है। सबकी अपनी अपनी भावनाएं होती है, मै कमजोर दिल का था तो मेरे लिए कुछ नही पर सबके लिए तो बहुत कुछ है।

ऐसा नही कि इस महीने में कुँवारे लोग ही व्यस्त रहते हैं, शादीशुदा व्यक्तियों के लिए भी यह माह महत्वपूर्ण है। जो लोग इस प्रेम दिवस को नही मनाते उन्हें, मन ही मन में समाज में पिछड़ जाने का दंश सहना पड़ता है क्योंकि यह त्यौहार विदेश से आया है, इसका अपना स्टेटस है, बड़े लोग मनाते है, पैसे वाले लोग मनाते है। हीनभावना न उपजे इसलिए भी बहुत से लोग छुप-छुपा कर प्रेम दिवस मनाते हैं, उपहार देते हैं, गाना गाते हैं, डांस करते हैं,पार्टी करते हैं ।

मामला चाहे प्रेम के प्रदर्शन का हो या उपहार देने का, मनाना पड़ता है। पिछले साल हमारी कालोनी में शम्भू की पत्नी ने प्रेम दिवस पर शम्भू को उपहार दे दिया, उसकी पहले से तैयारी नही थी। अब बेचारा साल भर सुनता रहा, उसका अपना ह्रदय भी बहुत कटोचता रहा कि प्रेम में पीछे रह गया। इस बार ह्रदय को कठोर करके इस उत्सव में अपना योगदान देने का निश्चय किया है। ऐसा नही कि अगला प्रेम नही करता पर गिफ्ट खरीदते समय कभी कभी प्रेम की जगह पैसा आ जाता है। राजकुमार के बच्चे कान्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं, उनके यहाँ तो इसे धार्मिक उत्सव जैसा मनाते हैं। धूमधाम से मनाते हैं। राजकुमार को पता नही चलता पर जेब तो उसकी ही ढीली होती है।

कुछ मिलाजुला कर फ़रवरी महीने में प्रेम एक हलचल जैसा उमड़ता है, जो प्रेम करते हैं उनके दिलों में भी और जो नही करते हैं उनके दिलों में भी। पूरे सप्ताह भर का कार्यक्रम होता है पर दिल पूरे महीने धड़कता है। प्रेमियों का दिल धड़कना भी चाहिए, जिसका नही धड़का वो प्रेमी कैसा। फ़रवरी में हलचल स्वाभाविक है क्योंकि प्रेम एक बेशकीमती तोहफा है। धन की चिंता किये बिना प्रेम दिवस मनाना चाहिए, मान-सम्मान की चिंता किये बिना प्रेम दिवस मनाना चाहिए, चाहे जेब ढीली हो, चाहे उल्लू ही बन रहे हो, चाहे जूते ही क्यों न पड़े प्रेम का एहसास ह्रदय में बना रहना चाहिए। प्रेम के इस त्यौहार में जरा भी चूक नही होनी चाहिए। याद रखें कुछ रहे न रहे प्रेम सदा रहेगा। प्रेम शाश्वत है।
- विनोद पांडेय
A Day in Swarn Jayanti Park
It is a beautiful park. It is far better than to waste time in nearby chain of shopping malls. We should enjoy and be good citizens in keeping it clean. Our Prime minister Shri Narandra Modi Ji also started ‘Sawakch Bharat Mission’...
Brave Persons Kept Moving in Life...
हम हर परिस्थिति के लिए प्रभु को कोसते - कोसते ही रहे...
और वो परिस्थिति को अपने अनुरूप बना कर, प्रभु को Thanks बोल कर, आगे बढ़ गये...
लव का महीना
जिस धरती पर सिर्फ बात कर लेने भर से गोली चल जाती है उस धरती पर बेचारे प्रेमी कैसी-कैसी यातनाएँ झेल कर भी उनको याद करते हैं और इस दिन को महोत्सव में बदल देते हैं।
स्वच्छता अभियान! ...एक लघुकथा
दीनापुर गाँव का जूनियर हाईस्कूल आज रोज से कुछ अधिक चमक रहा है।...
इस बार शम्भुनाथ भी हँस पड़े। तिवारी जी खिसियाते हुए इधर-उधर देखने लगे।
गर्म लू क़े थपेङे बदन में सुई चुबो रहे है...
बार बार गला ऐसा सूखता है जैसे प्यासा हो कुआँ। ऐसे ब्याकुल प्यास मैं ठण्डा पानी मिल जाए तो अम्रत के समान देव दानव मै कलह हुआ था, उस दृश्य का यहाँ साक्षात्कार हो जाता हैं।...
बारिश से सबक
हमेशा स्थिर और एक समान नियम काम नहीं करते हैं?
कभी-कभी रास्ता बनाने के लिए, रास्ते मैं पत्थर डालने भी पड़ते हैं|
सफलता की मंज़िल #LifeTeachesItself
जिंदगी में कुछ पाने की कोशिश में कभी हार नहीं माननी चाहिए कियोंकि अधिकांशतः जब अथक प्रयासों के बाद इंसान हार मान लेता है बस उसी अगले कदम पर सफलता और मंज़िल आपका इंतज़ार कर रही होती है
धैर्य को धन्यवाद #LifeTeachesItself
इंसान को वह सब कुछ मिलता है जो वह चाहता है लेकिन मिलना कब है वह इंसान नहीं ईश्वर की मर्ज़ी से निश्चित होता है। इसीलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि धैर्य का परिचय दिया जाये और ईश्वर पर भरोसा रखा जाये।
60 की उम्र और तजुर्बा
60+ उम्र के बाद, इंसान को इतना तजुर्बा होजाना चाहिए|
ना थोड़ी खुशी/तारीफ से वो खुश हो जाए, और...
Learn From A. P. J. Abdul Kalam
जो कर्मशील व्यक्ति होते हैं, ...वो भगवान के पास भी काम करते - करते ही जाते हैं!!
Bhagwan Valmiki MandirBhagwan Valmiki Mandir
Swami Raghawanand Ji Maharaj from Delhi Udasin Ashram inaugurated भगवान वाल्मीकि मंदिर (Bhagwan Valmiki Mandir) on the occasion of Valmiki Jayanti in 2015. Valmiki temple is easily accessible from Rohini East metro station.
पत्तल में खाने के महत्व
» पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है।
» केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है।
मटके के पानी के फायदे!
» इस पानी को पीने से थकान दूर होती है।
» इसे पीने से पेट में भारीपन की समस्या भी नहीं होती।
» मटके की मिट्टी कीटाणुनाशक होती है जो पानी में से दूषित पदार्थो को साफ करने का काम करती है।
हाथ-पैरों में आने वाले ‪पसीने‬ का उपचार
आँवला चूर्ण एवं पिसी हुई मिश्री बराबर मात्रा मे मिलाकर प्रतिदिन सुवह - शाम 1-1 चम्मच सेवन करने से कुछ समय मे ही, हाथ की हथेली और पैरों के तलवों से आने वाले पसीने की समस्या मे लाभ मिलता है...
गर्मियों में हाथ पैरों में अकड़ाहट
इसलिए प्याज के रस को गुनगुना करके हथेलियों और पैर के तलवों की मालिश करने से अकड़ाहट मे लाभ मिलता है...
तलवों मे जलन को दूर करें
गुनगुने पानी मे एक चम्मच सरसों का तेल डालकर दोनो पैर दस मिनट के लिए इसमें डुबाकर रखें...
प्रेरक कहानी: बाँके बिहारी जी का प्रेम
एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी...
मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ?
प्रेरक कथा: मैं ना होता तो क्या होता ?
पर हनुमान जी, प्रभु श्रीराम से कहते है...
प्रभु, यदि मैं लंका न जाता, तो मेरे जीवन में बड़ी कमी रह जाती। विभीषण का घर जब तक मैंने नही देखा था, तब तक मुझे लगता था, कि लंका में भला सन्त कहाँ मिलेंगे...
दिल्ली के प्रमुख श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर
List of top Shri Krishna Pranami Dharm Temples in New Delhi, Noida, Ghaziabad...
दिल्ली के प्रसिद्ध वाल्मीकि मंदिर!
Maharishi Valmiki is considered as the first poet of Sanskrit language. Indian valmiki samaj worship him as a God. List of Bhagwan Valmiki temples of New Delhi, Noida, Ghaziabad, and Gurugram.
दिल्ली के प्रसिद्ध श्री शनिदेव मंदिर - 25 May 2017
Surydev's son Shri Shanidev governs planet Saturn, one of the member in Navgrah. Devotees pray Him on weekday Saturday.
List of top famous Shri Shanidev temples in New Delhi, Noida, Gurugram and Ghaziabad...
स्वच्छ भारत अभियान - Swachh Bharat Abhiyan
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